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और बताओ मेरे दोस्त

3rd June 2026

और बताओ मेरे दोस्त,

कैसी लग रही है दुनिया?

हर पल की एक पहचान,

जो इन अनेक रंगों में निखरती है।

जहाँ कोमलता शोर से डरती है,

जहाँ इल्ज़ामें भी सच से भरती हैं।

और बेपहचान गुज़रता अँधेरा,

जो रोशनी में निखरता दिखा क्यों?

वो समय की पहचान है शायद,

मिले इन रंगों में भी एकता क्यों?

कैसी लग रही है दुनिया तुझे?

बिन समझे जो समझ भी न आए,

जो मिला दे हर आवाज़ से मुझे,

जिसको समझ के भी वो पहचान न पाए।

किस पहचान में रूठेगी ये दुनिया?

निर्दोष बचपने को कौन समेट पाएगा?

अखंड ज्ञान को किताब में कौन लपेट पाएगा?

पहचान की बेड़ियों से मुक्त है ये दुनिया।

तो कैसी लगी तुम्हें दुनिया?

बता पाओगे, मेरे दोस्त?