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कवि की कविता

20th September 2024

कवि जब अपने लिए

या दूसरों के लिए लिखता है,

तो इन अल्फ़ाज़ में फ़र्क है।

जब दुनिया की कामनाएँ सर पर गिरें,

तो मन भी तो सतर्क है।

जब कभी दिल से कहे बात,

तो हवा की तरह उड़ता जाता मेरा मन।

जब दूसरों की कहानी सुनाऊँ,

तो शब्द आते

जैसे हल्की गिरती सावन।

कुछ भी हो,

दोनों में एक चीज़ तो है वही—

अपनी सोच में हो जाते हैं हम गुम।

ये कविता किसके लिए लिखी?

न मैं जानूँ, न तुम।