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सांवली-सी रात, बचपनी-सी बात
13th October 2024सांवली-सी रात, बचपनी-सी बात,
इन लफ़्ज़ों को जानें हम।
इस पल को कब पहचानें हम?
आख़िर एक पल जी ले तू,
जीवन का ढोल इन यादों से ही बजाते हैं।
इन पलों से ही तो अपने आप को सजाते हैं।
दिये और चाँद की रोशनी क्या,
सूरज भी सो जाता है।
जब अधूरी बातें हवा में उड़ें,
स्नेह के पर्दे ही तो उसे बचाते हैं।
खो न जाएँ अल्फ़ाज़ कहीं,
पूरा करें इन बातों को यहीं।
इस सांवली रात में हमारी बचपनी-सी बात,
इन लफ़्ज़ों को जानें हम।
इन लफ़्ज़ों को समझ लिया।